Wednesday, August 5, 2009

फर्क

मेरे एक सहकर्मी, हैरान, परेशान, बदहवास, टूटे फूटे से। अक्सर अपनी बीवी की बुराइयां करते, उसकी शिकायतों से भरे, उसकी बीमारियों से चिंताग्रस्त। उनके शोकाकुल चुसनी आम जैसे चहरे पर चश्मे के पीछे दो उल्लू सरीखी गोल गोल आंखें, अपनी बीवी की बुराइयों के बाद किसी महिला सहकर्मी से सहानुभूति पाते ही दप्प से चमक उठती हैं, फ़िर चेहरे पर मायूसी के भाव लाकर झट से झुक जाती हैं के कहीं सामने वाली कुछ भांप न ले। दरअसल मेरे ये सहकर्मी अपनी अधेडावस्था में हैं लिहाजा बीवी की बुराइयां करके जवान महिला सहकर्मियों से सहानुभूति से ज़्यादा कुछ और पा नही पाते, लेकिन समाज में इन जैसे बहुत हैं। जो जवान हैं वे बीवी-पुराण सुनाने की कला का बखूबी इस्तेमाल करके घर से बाहर काफ़ी कुछ हासिल कर लेते हैं। बहुत अफ़सोस होता है उन बीवियों पर, जो आजीवन इन धूर्तों को भगवान् का दर्जा देकर अपने सर-माथे पर बिठाये रखती हैं। मेरी एक कविता मैं इन धूर्तों को और इनकी मासूम बीवियों को भेंट करती हूँ और खासकर अपने इस सहकर्मी को, जिसकी बातों ने मुझे ये कविता लिखने की प्रेरणा दी। ऐसे पतियों को मैं बेवकूफ और कुंठित व्यक्तियों की श्रेणी में रखती हूँ। दरअसल ऐसे लोग भीतर से बिल्कुल खोखले होते हैं। एक भिखारी से भी ज़्यादा दरिद्र।

फर्क

वो

जब पड़ोस वाली

सड़क वाली

बस स्टाप वाली

ऑफिस वाली

बाज़ार वाली

के बीच

हँसी ठिठोली

नैन मटक्का

कर

रात में

घर वाली के

बगल लेटता है

तो सोचता है

ज़िन्दगी कितनी नीरस है

मेरे तो भाग्य ही फूट गए।

और वो

जब सारा दिन

खाली घर

सूनी दीवारों

रिसते नल

बिखरे बर्तनों

के बीच

भूतनी सी

टकराती

घूमती

थकती

रात में

घरवाले के

बगल लेटती है

तो सोचती है

ज़िन्दगी में कितना सुख है

मुझ सी भाग्यवान भी कोई है?

9 comments:

  1. aap kavita bhi likhti hain, yah jankar shukhad aashcharya hua. aur yah jankar bhi khusi hui ki aapne apne sahkarmi ke madhyam se aise tamam kutsit vichar walon ki pol khol di.

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  2. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  3. उपयोगी प्रस्तुति है। आशा है इस काम को आगे बढायेंगे।

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  4. मुझे आपके इस सुन्‍दर से ब्‍लाग को देखने का अवसर मिला, नाम के अनुरूप बहुत ही खूबसूरती के साथ आपने इन्‍हें प्रस्‍तुत किया आभार् !!

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  5. nasim bahin ,mard bitta saa hotaa hai ,aurat ke saamne uski aukaat hi kyaa hai .mard ki sahi aukaat jaan ni hai to Achary Nishant Ketu ki kriti "yoshaagni "padhiye .badhaai ,veerubhai

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  6. हाहाहाह कमाल की लिखा है आपने किसी को देखकर समझकर मजा आ गया ऐसा ही असल में होता है

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  7. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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